अष्टकम्
श्री दिव्य दुर्गाष्टकम्
परिचय
देवी दुर्गा की आठ पदों में स्तुति का परिचय। नवरात्रि और दुर्गा-उपासना के संदर्भ में इसका पाठ होता है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
पाठ
दुर्गे परेशि शुभदेशि परात्परेशि वन्द्ये महेशदयिते करुणार्णवेशि । स्तुत्ये स्वधे सकलतापहरे सुरेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ १॥
दिव्ये नुते श्रुतिशतैर्विमले भवेशि कन्दर्पदाराशतसुन्दरि माधवेशि । मेधे गिरीशतनये नियते शिवेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ २॥
रासेश्वरि प्रणततापहरे कुलेशि धर्मप्रिये भयहरे वरदाग्रगेशि । वाग्देवते विधिनुते कमलासनेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ३॥
पूज्ये महावृषभवाहिनि मंगलेशि पद्मे दिगम्बरि महेश्वरि काननेशि । रम्येधरे सकलदेवनुते गयेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ४॥
श्रद्धे सुराऽसुरनुते सकले जलेशि गंगे गिरीशदयिते गणनायकेशि । दक्षे स्मशाननिलये सुरनायकेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ५॥
तारे कृपार्द्रनयने मधुकैटभेशि विद्येश्वरेश्वरि यमे निखलाक्षरेशि । ऊर्जे चतुःस्तनि सनातनि मुक्तकेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ६॥
मोक्षेऽस्थिरे त्रिपुरसुन्दरिपाटलेशि माहेश्वरि त्रिनयने प्रबले मखेशि । तृष्णे तरंगिणि बले गतिदे ध्रुवेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ७॥
विश्वम्भरे सकलदे विदिते जयेशि विन्ध्यस्थिते शशिमुखि क्षणदे दयेशि । मातः सरोजनयने रसिके स्मरेशि कृष्णस्तुते कुरु कृपां ललितेऽखिलेशि ॥ ८॥
अर्थ
हे माँ दुर्गा! हे परमेश्वरी! हे शुभ फल प्रदान करने वाली! हे परात्पर (श्रेष्ठ से भी श्रेष्ठ) ईश्वरी! हे भगवान शिव की प्रियतमा! हे करुणा की सागर! हे वंदनीय, स्तुति के योग्य, और स्वधा स्वरूपा! आप समस्त दुखों (तापों) को हरने वाली और देवताओं की स्वामिनी हैं। हे श्रीकृष्ण द्वारा पूजित ललिता माँ! हे सम्पूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी! मुझ पर कृपा करें।
हे दिव्य स्वरूपा! जिनकी वंदना सैकड़ों वेद (श्रुतियां) करते हैं! हे निर्मल भवानी! हे करोड़ों कामदेवों की स्त्रियों से भी अधिक सुंदर! हे माधव (विष्णु) की शक्ति! हे बुद्धि स्वरूपा मेधा! हे पर्वतराज की पुत्री! हे नियति और शिव की प्रिय! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे रासमंडल की ईश्वरी! हे शरण में आए भक्तों के कष्टों को हरने वाली! हे कुल की देवी! हे धर्म की प्रेमी! हे भय को मिटाने वाली और वरदान देने वालों में श्रेष्ठ! हे वाणी की देवी सरस्वती! हे ब्रह्मा जी द्वारा पूजित और लक्ष्मी स्वरूपा! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे पूजनीय! हे महान वृषभ (नंदी) पर सवार होने वाली! हे मंगल करने वाली! हे लक्ष्मी (पद्मा)! हे दिगंबर (दिशाओं को वस्त्र बनाने वाली)! हे महेश्वरी! हे वनों की स्वामिनी! हे पृथ्वी को धारण करने वाली सुंदर माँ! हे सभी देवताओं द्वारा वंदनीय गया की स्वामिनी! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे श्रद्धा स्वरूपा! देवताओं और असुरों द्वारा पूजित, सम्पूर्ण कलाओं से युक्त, जल की स्वामिनी! हे गंगे! हे शिव की प्रिय! हे गणेश (गणनायकेशि) की माता! हे दक्ष की पुत्री सती! हे श्मशान में निवास करने वाली उग्र रूपिणी और देवताओं की नायक! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे तारने वाली माँ (तारा)! जिनकी आँखें करुणा से भीगी हुई हैं! हे मधु और कैटभ नामक असुरों का नाश करने वाली! हे विद्या और ईश्वरों की भी ईश्वरी! हे यम (नियम) स्वरूपा! हे सम्पूर्ण अक्षरों की स्वामिनी! हे ऊर्जा की स्रोत, सनातन शक्ति और खुले केशों वाली (काली)! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे मोक्ष प्रदान करने वाली! हे त्रिपुरसुंदरी! हे पाटला (गुलाब) वर्ण वाली! हे माहेश्वरी! हे तीन नेत्रों वाली! हे अत्यंत शक्तिशाली और यज्ञों (मख) की स्वामिनी! हे तृष्णा, चंचलता और शक्ति स्वरूपा! हे सबको गति देने वाली और ध्रुव (स्थिर) रहने वाली! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।
हे विश्व को धारण करने वाली! सब कुछ देने वाली! हे विख्यात विजय की देवी! हे विंध्याचल पर निवास करने वाली! हे चन्द्रमा के समान मुख वाली! हे क्षण भर में दुख हरने वाली दयामयी माँ! हे कमल जैसे नेत्रों वाली, रसिकों की प्रिय और कामदेव पर शासन करने वाली माँ! हे कृष्ण द्वारा पूजित माँ! मुझ पर कृपा करें।