आरती
गजबदन विनायक की आरती
परिचय
“आरती गजबदन विनायक की” — गजमुख विनायक की प्रचलित आरती। मुखड़ा “सुर-मुनि-पूजित गणनायक की” हर छंद के बाद दोहराया जाता है। प्रत्येक छंद के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।
पाठ
आरती गजबदन विनायककी। सुर-मुनि-पूजित गणनायककी॥
एकदन्त शशिभाल गजानन, विघ्नविनाशक शुभगुण कानन। शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन, दुःखविनाशक सुखदायक की॥
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति। अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति, विद्या-विनय-विभव-दायककी॥
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर, धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर। लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर, सुर-वन्दित सब विधि लायककी॥
अर्थ
गजमुख विनायक की आरती — जिनकी सूर्य, मुनि और देवता सब स्तुति करते हैं।
एक दाँत और चंद्रमा की आभा वाले गजानन — विघ्नों के नाश करने वाले और गुणों की खान; शिवपुत्र चतुरानन की आरती, जो दुःख हरते और सुख देते हैं।
ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी, अत्यंत समर्थ; शुद्ध बुद्धि और निर्मल मति देने वाले; पाप-रूपी वन को जलाने वाले, निष्कलंक और अथाने — विद्या, विनय और ऐश्वर्य देने वाले की आरती।
पीले नेत्रों, विशाल सूँड और धूसर वर्ण वाले; वज्र-अंकुश धारण करने वाले; बाधा-विपत्ति हरने वाले लम्बोदर की, देवताओं द्वारा सर्वथा वंदित की आरती।