आरती

गणेश जी की आरती

गणेश जी की आरती

परिचय

“जय गणेश जय गणेश देवा” — गणेश जी की सबसे प्रचलित हिंदी आरती। प्रत्येक पंक्ति के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।

पाठ

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी। माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

दीनन की लाज राखो शंभु सुत वारी। कामना को पूरा करो जाऊँ बलिहारी॥

अर्थ

गणेश जी की जय हो, जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

एक दाँत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले गणेश के माथे पर सिंदूर शोभता है और वे मूषक पर सवार हैं।

उन्हें पान, फूल और मेवे अर्पित होते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संत सेवा करते हैं।

वे अंधों को नेत्र, रोगियों को स्वास्थ्य, निःसंतानों को संतान और निर्धनों को संपन्नता देते हैं — ऐसा माना जाता है।

कवि सूर-श्याम आपकी शरण आया है; उसकी सेवा सफल कीजिए।

हे शंभु-पुत्र, दीनों की लाज रखिए और मनोकामनाएँ पूर्ण कीजिए; मैं आप पर बलिहारी जाता हूँ।

रचयिता

पारंपरिक