ब्रह्मा चालीसा
सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
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ब्रह्मा चालीसा
सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
श्री हनुमान चालीसा
श्री हनुमान चालीसा का प्रचलित हिंदी पाठ और प्रत्येक दोहे व चौपाई का सरल हिंदी अर्थ। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
श्री कुबेर चालीसा
धन के अधिपति कुबेर को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
पितर चालीसा
पितरों (पूर्वजों) को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। पितृपक्ष में पितर-स्मरण की विशेष परंपरा है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
रविदास चालीसा
संत शिरोमणि गुरु रविदास को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
श्री सरस्वती चालीसा
विद्या और कला की देवी सरस्वती को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
शिव चालीसा
भगवान शिव को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
गोरख चालीसा
नाथ परंपरा के गुरु गोरखनाथ को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
भक्ति संग्रह
स्तोत्र संग्रह
श्री सरस्वती स्तोत्र
विद्या की देवी सरस्वती की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। विद्यार्थियों और साधकों में इसका पाठ प्रचलित है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
ऋणमोचन मंगल स्तोत्र
मंगल ग्रह की कृपा से ऋण-मोचन की कामना में रचित स्तोत्र का परिचय। मंगलवार को इसका पाठ विशेष प्रचलित है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
श्री हरि स्तोत्रम्
भगवान हरि (विष्णु) की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। “जगज्जालपालम्” से आरंभ होने वाला प्रसिद्ध हरि-स्तोत्र इसी परंपरा का है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
ऋणहर्ता श्री गणेश स्तोत्रम्
ऋण हरने वाले गणेश की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। गणेश को समर्पित ऋण-मोचन विषयक एक से अधिक स्तोत्र प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के अनुसार समझें।
नाग स्तोत्रम्
नाग देवताओं की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। नाग पंचमी पर नाग-स्मरण की विशेष परंपरा है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम्
ऋण से मुक्ति की कामना के साथ श्री गणेश की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
लक्ष्मी के आठ रूपों (आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, विजय, विद्या) की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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आरती संग्रह
गणेश जी की आरती
“जय गणेश जय गणेश देवा” — गणेश जी की सबसे प्रचलित हिंदी आरती। प्रत्येक पंक्ति के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।
हनुमान जी की आरती
“आरती कीजै हनुमान लला की” — हनुमान जी की प्रचलित आरती। प्रत्येक पंक्ति के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।
श्री गणपति जी की आरती
“गणपति की सेवा मंगल मेवा” — श्री गणपति की प्रचलित आरती। मुखड़ा हर छंद के बाद दोहराया जाता है। प्रत्येक छंद के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।
गजबदन विनायक की आरती
“आरती गजबदन विनायक की” — गजमुख विनायक की प्रचलित आरती। मुखड़ा “सुर-मुनि-पूजित गणनायक की” हर छंद के बाद दोहराया जाता है। प्रत्येक छंद के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।
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अष्टकम् संग्रह
शिवाष्टकम् (शिव अष्टकम्)
भगवान शिव की आठ पदों में स्तुति का परिचय। “प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथम्” से आरंभ होने वाला प्रसिद्ध शिवाष्टक इसी परंपरा का है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
अच्युताष्टकम्
“अच्युतं केशवं रामनारायणम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध विष्णु-स्तोत्र का परिचय। परंपरा इसकी रचना आदि शंकराचार्य को समर्पित मानती है। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
सत्यनारायण अष्टकम् स्तोत्र
सत्यनारायण (विष्णु) की आठ पदों में स्तुति का परिचय। सत्यनारायण कथा और व्रत की परंपरा से यह जुड़ा है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
गणेशाष्टकम्
विघ्नहर्ता गणेश की आठ पदों में स्तुति का परिचय। गणेश को समर्पित एक से अधिक अष्टक-परंपराएँ प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
कृष्णाष्टकम्
“वसुदेव सुतं देवम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध कृष्णाष्टक का परिचय। परंपरा इसकी रचना वल्लभाचार्य को समर्पित मानती है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम्
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माने जाने वाले शिवाष्टक का परिचय। शिव को समर्पित एक से अधिक शिवाष्टक प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के अनुसार समझें।
श्री दिव्य दुर्गाष्टकम्
देवी दुर्गा की आठ पदों में स्तुति का परिचय। नवरात्रि और दुर्गा-उपासना के संदर्भ में इसका पाठ होता है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
संकटमोचन हनुमानाष्टक
हनुमान जी के आठ पदों में संकट-मोचन स्वरूप का स्मरण। प्रत्येक पद के अंत में “को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो” की टेक आती है। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
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