
भक्ति पाठ
गणेशाष्टकम्
विघ्नहर्ता गणेश की आठ पदों में स्तुति का परिचय। गणेश को समर्पित एक से अधिक अष्टक-परंपराएँ प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
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भक्ति पाठ
विघ्नहर्ता गणेश की आठ पदों में स्तुति का परिचय। गणेश को समर्पित एक से अधिक अष्टक-परंपराएँ प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
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देवी दुर्गा की आठ पदों में स्तुति का परिचय। नवरात्रि और दुर्गा-उपासना के संदर्भ में इसका पाठ होता है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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हनुमान जी के आठ पदों में संकट-मोचन स्वरूप का स्मरण। प्रत्येक पद के अंत में “को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो” की टेक आती है। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
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“वसुदेव सुतं देवम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध कृष्णाष्टक का परिचय। परंपरा इसकी रचना वल्लभाचार्य को समर्पित मानती है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
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आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माने जाने वाले शिवाष्टक का परिचय। शिव को समर्पित एक से अधिक शिवाष्टक प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के अनुसार समझें।
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भगवान शिव की आठ पदों में स्तुति का परिचय। “प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथम्” से आरंभ होने वाला प्रसिद्ध शिवाष्टक इसी परंपरा का है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।
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देवी सरस्वती की आठ पदों में स्तुति का परिचय। विद्या और कला की साधना से जुड़े भक्तों में इसका पाठ प्रचलित है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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“अच्युतं केशवं रामनारायणम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध विष्णु-स्तोत्र का परिचय। परंपरा इसकी रचना आदि शंकराचार्य को समर्पित मानती है। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।
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भगवान सूर्य की आठ पदों में स्तुति का परिचय। रविवार के सूर्य-पूजन और छठ जैसे पर्वों से यह परंपरा जुड़ी है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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सत्यनारायण (विष्णु) की आठ पदों में स्तुति का परिचय। सत्यनारायण कथा और व्रत की परंपरा से यह जुड़ा है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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शिव और राम दोनों की एक साथ स्तुति करने वाले इस स्तोत्र का परिचय। हरि-हर एकता की भक्ति-परंपरा से यह जुड़ा है; प्रत्येक पद "शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्" की टेक पर समाप्त होता है। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।
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