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कृष्ण चालीसा (द्वितीय पाठ)

बाल-कृष्ण (गोपाल) को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह श्री कृष्ण चालीसा (“बंशी शोभित”) और कृष्ण चालीसा (“बांके बिहारी”) से भिन्न रचना है। संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।

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श्री कुबेर चालीसा

धन के अधिपति कुबेर को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।

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श्री नवग्रह चालीसा

नौ ग्रहों को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। यह पाठ प्रचलित मुद्रित परंपरा के अनुसार है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।

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ऋणमोचन मंगल स्तोत्र

मंगल ग्रह की कृपा से ऋण-मोचन की कामना में रचित स्तोत्र का परिचय। मंगलवार को इसका पाठ विशेष प्रचलित है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्

लक्ष्मी के आठ रूपों (आदि, धन, धान्य, गज, संतान, वीर, विजय, विद्या) की स्तुति में रचित स्तोत्र का परिचय। पाठ-परंपराओं में शब्द भिन्न हो सकते हैं।

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श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र

हनुमान जी को समर्पित वडवानल (बड़वानल) स्तोत्र का परिचय। परंपरा के अनुसार यह विभीषण द्वारा रचित माना जाता है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।

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शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम्

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माने जाने वाले शिवाष्टक का परिचय। शिव को समर्पित एक से अधिक शिवाष्टक प्रचलित हैं; पाठ अपनी परंपरा के अनुसार समझें।

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अच्युताष्टकम्

“अच्युतं केशवं रामनारायणम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध विष्णु-स्तोत्र का परिचय। परंपरा इसकी रचना आदि शंकराचार्य को समर्पित मानती है। पाठ-परंपराओं में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।

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गजबदन विनायक की आरती

“आरती गजबदन विनायक की” — गजमुख विनायक की प्रचलित आरती। मुखड़ा “सुर-मुनि-पूजित गणनायक की” हर छंद के बाद दोहराया जाता है। प्रत्येक छंद के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।

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श्री गणपति जी की आरती

“गणपति की सेवा मंगल मेवा” — श्री गणपति की प्रचलित आरती। मुखड़ा हर छंद के बाद दोहराया जाता है। प्रत्येक छंद के नीचे सरल अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ दिया गया है। क्षेत्रों और परिवारों में शब्द और धुन भिन्न हो सकते हैं।

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कृष्णाष्टकम्

“वसुदेव सुतं देवम्” से आरंभ होने वाले प्रसिद्ध कृष्णाष्टक का परिचय। परंपरा इसकी रचना वल्लभाचार्य को समर्पित मानती है। संस्कृत पाठ विश्वसनीय संस्करण से मिलाएँ।

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रानी सती चालीसा

रानी सती (दादी माँ, झुंझुनूं) को समर्पित प्रचलित चालीसा का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक पंक्ति के अंग्रेज़ी अर्थ और हिंदी भावार्थ सहित। मारवाड़ी भक्त-समुदाय में इनकी विशेष मान्यता है; संस्करणों में वर्तनी के छोटे अंतर मिल सकते हैं।

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